सक्ती / शासकीय भूमि की सुरक्षा और राजस्व नियमों का पालन करने के बजाय, उसमें हेरफेर कर निजी स्वार्थ साधने वाले पटवारी पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। तहसील बाराद्वार के ग्राम सकरेली में सरकारी जमीन का अवैध रूप से बिक्री छांट जारी करने के मामले में पटवारी मनहरण लाल राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम सकरेली के मूल खसरा नंबर 1311 की भूमि राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय दर्ज है। अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 के अनुसार, यह जमीन ‘छोटे झाड़ के जंगल’ और ‘घास मद’ के अंतर्गत आती है। नियमानुसार ऐसी भूमि का हस्तांतरण या निजी विक्रय प्रतिबंधित होता है। उसके उपरांत भी पटवारी ने शासकीय जमीन को गलत तरीके से बिक्री छांट जारी कर दिया
लापरवाही और स्वेच्छाचारिता आई सामने
पटवारी मनहरण लाल राठौर ने अपने पदीय कर्तव्यों का दुरुपयोग करते हुए इस प्रतिबंधित शासकीय भूमि का ‘बिक्री छांट’ जारी कर दिया। जांच में यह पाया गया कि पटवारी ने न केवल नियमों की अनदेखी की, बल्कि अपनी स्वेच्छाचारिता से शासन को क्षति पहुँचाने का प्रयास किया। इसे घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता मानते हुए तहसीलदार के प्रतिवेदन पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सक्ती ने निलंबन की कार्रवाई सुनिश्चित की। निलंबन के आदेश पर यह उल्लेख किया गया है कि
कार्यालय तहसीलदार बाराद्वार, जिला-सुक्ती (छ.ग.) के प्रतिवेदन दिनांक 10/12/2025 के अनुसार ग्राम सकरेली बाराद्वार के पटवारी मनहरण लाल राठौर के द्वारा ग्राम सकरेली के शासकीय भूमि मूल खसरा नंबर 1311 का नियम विरूद्ध बिक्री छांट जारी किया गया है। उक्त भूमि अधिकार अभिलेख 1954-55 के राजस्व रिकार्ड में छोटे झाड़ के जंगल एवं घास मद में दर्ज है। अतएव मनहरण लाल राठौर पटवारी तहसील बाराद्वार के द्वारा शासकीय भूमि का बिक्री छांट जारी कर अपने पदीय कर्त्तव्यों के प्रति धोरलापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता को प्रदर्शित किया है, जिसके कारण मनहरण लाल राठौर पटवारी तहसील बाराद्वार को छ०ग० सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 (1) के तहत् तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
वही निलंबन काल में उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय बाराद्वार रहेगा तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।
अगर पटवारी में मुंह खोला तो कई राज आएंगे सामने
बताया जा रहा है इस मामले में केवल पटवारी ही शामिल नहीं था इसमें कुछ और लोग भी शामिल थे अगर कहीं पटवारी ने इस मामले को लेकर सही राज उगल दिया तो कुछ जमीन दलाल और कुछ अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं अब देखना यह है कि इस मामले में जांच केवल निलंबन तक ही रहती है कि आगे भी कुछ और बड़ा होने वाला है वैसे भी इस मामले को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी अपने चार सूत्रीय मांगों को लेकर विगत 21 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं अगर उसे चार सूत्री मांगों पर जांच होगी तो अच्छे-अच्छे लोग नपते नजर आएंगे
