बसदेई में बिजली विभाग की मनमानी चरम पर

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बसदेई। क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बुधवार की सुबह भैयाथान से पहुंचे लाइनमेन ने बसदेई चौक स्थित बजरंग होटल का बिजली कनेक्शन बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या विभागीय प्रक्रिया के सीधे पोल पर चढ़कर काट दिया। घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों के बीच भारी आक्रोश फैल गया।

“50 हजार का बकाया बताकर कनेक्शन काटा, पर बड़े बकायेदारों पर कार्रवाई नहीं”

होटल संचालक के अनुसार लाइनमेन ने कहा कि 50,000 रुपये बकाया होने की वजह से कनेक्शन काटा गया है। लेकिन संचालक का आरोप है कि बसदेई, भैंसामुंडी, कोनरगढ़ और आसपास के इलाकों में कई उपभोक्ताओं का एक लाख रुपये तक बिजली बिल लंबित है, फिर भी विभाग उनकी लाइन नहीं काटता।
संचालक ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि—
“यह कार्रवाई नियमों के आधार पर नहीं, बल्कि निजी शिकायतों और व्यक्तिगत रंजिश पर की जा रही है।”

“बार-बार वसूली फिर भी कार्रवाई, आखिर क्या है मकसद?”

होटल संचालक ने यह भी आरोप लगाया कि हर बार विभागीय कर्मचारी जब भी मौके पर पहुँचते हैं, उनसे 10,000 रुपये तक ‘समायोजन’ के नाम पर वसूला जाता रहा है, इसके बावजूद होटल को बार-बार टारगेट किया जा रहा है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह विभागीय दबाव और मनमानी का साफ उदाहरण है, जहाँ एक ही प्रतिष्ठान को निशाना बनाकर दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।

स्थानीय लोग भड़के — “नियम सब पर समान रूप से लागू हों”

घटना के बाद बसदेई चौक में आसपास के व्यापारी इकट्ठा हो गए और विभाग की कार्यशैली पर तीखी प्रतिक्रिया दी। लोगों का कहना है कि—

यदि बकायाधारकों पर कार्रवाई होनी है, तो सभी पर समान नियम लागू हों,

विभाग निष्पक्षता दिखाते हुए समान मानक अपनाए,

किसी एक होटल या व्यापारी को बार-बार निशाना बनाने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए।

नागरिकों ने कहा कि बिजली विभाग की कार्रवाई चयनात्मक दिखाई देती है। बड़े बकायेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं, जबकि छोटे व्यापारियों को बार-बार परेशान किया जा रहा है।

व्यापारियों में डर और नाराज़गी दोनों

घटना के बाद कई व्यापारियों ने चिंता जताई कि यदि विभाग ने ऐसी मनमानी जारी रखी, तो किसी भी समय किसी भी दुकान या होटल पर बिना नोटिस कार्रवाई की जा सकती है। इससे व्यावसायिक गतिविधियों पर सीधे असर पड़ रहा है।

विभागीय अधिकारियों की चुप्पी संदिग्ध

पूरा मामला तूल पकड़ने के बाद भी विभागीय अधिकारी घटना पर कोई स्पष्ट जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। न ही कोई नोटिस जारी किया गया, न ही कोई लिखित बकाया विवरण दिखाया गया।
लोगों का आरोप है कि विभागीय चुप्पी ही यह साबित करती है कि कार्रवाई नियमों के बजाय निजी शिकायतों और दबावों पर आधारित थी।

क्षेत्र में बढ़ती बेचैनी, पारदर्शी जांच की मांग

व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि घटना की उच्च-स्तरीय जांच हो और ऐसे लाइनमैन एवं अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए जो बिना प्रक्रिया, बिना नोटिस और बिना निर्धारित प्रोटोकॉल के उपभोक्ताओं को परेशान कर रहे हैं

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