रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का बजट राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। राज्य सरकार ने इस बार बजट को “ज्ञान का कल्याण” थीम के साथ पेश किया है, वहीं विपक्षी दलों और युवा संगठनों ने इसे “आंकड़ों का पुलिंदा” करार देते हुए कई सवाल खड़े किए हैं।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2000 में राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ का बजट 4,994 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 1,72,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार इसे 35 गुना वृद्धि बताते हुए अपनी वित्तीय प्रगति का प्रमाण बता रही है।
हालांकि, छत्तीसगढ़ प्रदेश युवा कांग्रेस के सह-समन्वयक एवं सोशल मीडिया प्रभारी राज कुमार चंद्रा ने बजट को “दिन में तारे दिखाने वाला” बताया। उनका कहना है कि युवा वर्ग विशेष रूप से 57,000 शिक्षक भर्ती की घोषणा का इंतजार कर रहा था, जिसे प्रधानमंत्री की ‘मोदी की गारंटी’ से जोड़ा जा रहा था, लेकिन बजट में इस संबंध में स्पष्ट प्रावधान या घोषणा नहीं की गई।
लाइब्रेरी और ग्रंथपाल भर्ती पर उठे सवाल
राज कुमार चंद्रा ने कहा कि राज्य में वर्ष 2008 से पुस्तकालय अधिनियम लागू है, इसके बावजूद स्कूलों में पुस्तकालयों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई स्कूलों में न तो पुस्तकालय की व्यवस्था है और न ही ग्रंथपालों की भर्ती की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि “ज्ञान का कल्याण” जैसे नाम के बावजूद बजट में स्कूल पुस्तकालयों और ग्रंथपाल भर्ती के लिए ठोस प्रावधान नजर नहीं आते। उन्होंने 33 नालंदा परिसरों की घोषणा को भी युवाओं के लिए “जाल” बताया और कहा कि प्रशिक्षित ग्रंथालय युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
‘संकल्प’ थीम पर आधारित बजट
सरकार ने इस बार बजट को ‘SANKALP’ थीम पर आधारित बताया है, जिसमें—
S – समावेशी विकास
A – अधोसंरचना
N – निवेश
K – कुशल मानव संसाधन
A – अंत्योदय
L – आजीविका (लाइवलीहुड)
P – नीति से परिणाम
सरकार का दावा है कि यह बजट राज्य के तीन करोड़ नागरिकों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित है।
वहीं युवा कांग्रेस का आरोप है कि संकल्प और घोषणाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर युवाओं, विद्यार्थियों और पुस्तकालय क्षेत्र से जुड़े प्रशिक्षित युवाओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
बजट को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जहां सरकार इसे विकासोन्मुखी और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया दस्तावेज बता रही है, वहीं विपक्ष इसे रोजगार और शिक्षा के मोर्चे पर निराशाजनक करार दे रहा है।
आने वाले दिनों में बजट पर विधानसभा और राजनीतिक मंचों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
