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जगदलपुर, 31 दिसंबर 2025/ बस्तर संभाग के नागरिकों के स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा फूटे चने में इंडस्ट्रियल कलर और औरामाईन ओ के उपयोग को लेकर जारी अलर्ट के बाद संभाग भर में हड़कंप मच गया है। इस हानिकारक औद्योगिक डाई के इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने बस्तर, कांकेर, नारायणपुर समेत सभी जिलों में बड़े व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर दबिश दी है और संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने विशेष जांच के लिए राज्य के बाहर प्रयोग शालाओं में भेजे हैं।
बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में अभिहित अधिकारी के मार्गदर्शन में खाद्य सुरक्षा टीम ने न केवल फूटे चने के थोक व्यापारियों के यहां छापेमारी की, बल्कि पनीर, खोवा, फ्रूट केक, टोस्ट और चॉकलेट्स जैसे उत्पादों के भी 13 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। विभाग की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मोटा और पतला सेव के नमूने अमानक पाए जाने पर न्याय निर्णयन अधिकारी द्वारा संबंधित फर्मों पर 25-25 हजार रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अलावा, मोती मलाई पनीर का नमूना फेल होने पर विधिवत विवेचना शुरू कर दी गई है, जिसे जल्द ही न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
संभाग के अन्य जिले कांकेर में भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। यहां खाद्य सुरक्षा विभाग ने फूटे चने के स्टॉक को जब्त कर लिया है और यह पता लगाया जा रहा है कि यह जहरीला चना कहां से आयात किया गया था। कांकेर से जब्त नमूनों को औरामाईन ओ की विशेष जांच के लिए राज्य के बाहर भेजा गया है। इसके साथ ही, जिले में अखबार या प्रिंटेड कागज में नाश्ता परोसने वाले दुकानदारों को सख्त नोटिस जारी करते हुए भविष्य के लिए चेतावनी दी गई है। दिसंबर माह में कांकेर से कुल 10 नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और 6 कारोबारियों को नमूने फेल होने पर नोटिस थमाया गया है।
नारायणपुर और कोंडागांव जिलों में भी यह अभियान जोर-शोर से चल रहा है। नारायणपुर से फूटे चने के विधिक नमूने जांच के लिए गुरुग्राम (हरियाणा) स्थित नेशनल कमोडिटीज मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड भेजे गए हैं, जबकि चॉकलेट के निगरानी नमूने सूरत (गुजरात) की प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। कोंडागांव में भी कन्फेक्शनरी विक्रेताओं और अन्य प्रतिष्ठानों से मोमोस, उसना चावल और धुली उड़द दाल के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
संभाग के दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों में चलित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला ने मौके पर ही सैकड़ों खाद्य पदार्थों की जांच की। दंतेवाड़ा में 60, सुकमा में 45, बीजापुर में 25 और बस्तर में 53 नमूनों की तत्काल जांच की गई, जिसमें गड़बड़ी पाए जाने पर कई जगह खाद्य सामग्री को मौके पर ही नष्ट करवा दिया गया।
प्रशासन ने आम जनता और छोटे व्यापारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ठेले, गुमटी और होटल संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे खाद्य सामग्रियों को अनिवार्य रूप से ढककर रखें और नाश्ता देने के लिए अखबार के बजाय साफ प्लेट या दोने का उपयोग करें। साथ ही, खुली मिठाइयों और खाद्य पदार्थों को मक्खियों से बचाने के लिए जाली या नेट का प्रयोग करने और मिठाई की ट्रे पर निर्माण व एक्सपायरी तिथि लिखने का आदेश दिया गया है। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे खाद्य गुणवत्ता के प्रति सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध मिलावट की सूचना तत्काल विभाग को दें।