कांकेर। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए माओवादी संगठन के डीवीसीएम (डिविजनल कमेटी मेंबर) मल्लेश ने बुधवार को Border Security Force (BSF) के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
मल्लेश ने छोटेबेठिया स्थित बीएसएफ कैंप पहुंचकर AK-47 रायफल के साथ हथियार डाले। वह ग्रामीणों के साथ कैंप पहुंचा और मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा जताई। इसमें सामाजिक कार्यकर्ता मैनू किरिंगा, मंगड़ू कचलामी और इलाके में सक्रिय दो पत्रकारों ने अहम योगदान दिया।
आत्मसमर्पण की प्रक्रिया बीएसएफ की 94वीं वाहिनी के सामने किया। अधिकारियों ने बताया कि मल्लेश संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहा था और लंबे समय से सुरक्षा बलों की निगरानी में था।
सूत्रों के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय पत्रकारों के प्रयासों से यह आत्मसमर्पण संभव हो सका। क्षेत्र में इसे एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
बीएसएफ अधिकारियों ने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी नेता को आवश्यक सहायता और पुनर्वास का लाभ दिया जाएगा।
क्षेत्र के ग्रामीणों ने भी इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे इलाके में शांति और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
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