Saturday, January 17, 2026

पैंक्रियाटिक कैंसर: देर से दिखते हैं लक्षण, बढ़ रही जागरूकता की जरूरत

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पैंक्रियाटिक कैंसर अग्नाशय की कोशिकाओं में शुरू होने वाला कैंसर है, जो पेट के पीछे स्थित एक अंग है और यह पाचन एंजाइम तथा रक्त शर्करा नियंत्रित करने वाले हार्मोन उत्पन्न करता है। सबसे सामान्य प्रकार पैंक्रियाटिक डक्टल एडेनोकार्सिनोमा है, जो अग्नाशय से पाचन एंजाइम ले जाने वाली नलिकाओं की कोशिकाओं से विकसित होता है। यह कैंसर चुपचाप बढ़ता है और प्रारंभिक लक्षण दुर्लभ होने से अक्सर उन्नत अवस्था में ही निदान होता है।

प्रकार—–
**अग्नाशय में दो मुख्य प्रकार की कोशिकाएं होती हैं जहां कैंसर विकसित हो सकता है: एक्सोक्राइन कोशिकाएं जो पाचन के लिए एंजाइम बनाती हैं, तथा एंडोक्राइन कोशिकाएं जो हार्मोन उत्पन्न करती हैं। लगभग 90-95% पैंक्रियाटिक कैंसर एक्सोक्राइन भाग से उत्पन्न एडेनोकार्सिनोमा होते हैं। कम सामान्यतः पैंक्रियाटिक न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर हार्मोन उत्पादक कोशिकाओं से होते हैं, जो धीमी गति से बढ़ते हैं।

प्रसार और लक्षण—–
**पैंक्रियाटिक कैंसर कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं, ट्यूमर बनाती हैं जो स्वस्थ ऊतकों को नष्ट कर सकती हैं तथा लीवर, फेफड़े और लिम्फ नोड्स जैसे अन्य भागों में फैल सकती हैं। देर से लक्षण प्रकट होते हैं, जिनमें पीलिया, पेट दर्द, वजन घटना तथा पाचन संबंधी समस्याएं शामिल हैं। उपचार रोग की सीमा पर निर्भर करता है, जिसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी तथा रेडिएशन थेरेपी हो सकती है।

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